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कर्म ही प्रधान है कर्म ही प्रबुद्ध है  कर्म ही प्रवीर है कर्म ही प्रदीप्त है

कर्म से संलिष्ट है प्रविष्टि प्रभाव की  कर्म ही प्रवृत्ति है प्रारब्द्ध प्रवाह की

नई डगर की राह पर रहे जो नित्य अग्रसर  नई उमंग नई तरंग नये स्वप्न से सींच कर

है प्राण वो प्रयाण वो प्रखर उदीयमान वो  तिमिर प्रभा प्रयाग पर प्रकट प्रज्ञ प्रमाण वो

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